दैनिक जागो वर्ल्ड अरुणाचल प्रदेश

भारत ने अरुणाचल प्रदेश का आधिकारिक नक्शा अपडेट किया है, जिसमें चीन से सटे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 27 स्थानों को भारतीय नामों के साथ दर्शाया गया है।भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के आधिकारिक सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे को अपडेट किया है। अपडेटेड नक्शे में चीन की सीमा से जुड़े रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दर्रे, झीलें, बस्तियां और 1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़े एक युद्ध स्मारक को शामिल किया गया है।दरअसल, भारत द्वारा नक्शे में यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश को जंगनान या दक्षिण तिब्बत बताकर वहां के कई स्थानों के नाम बदलने की कोशिश करता रहा है।

अरुणाचल प्रदेश के आधिकारिक सर्वे ऑफ इंडिया के मैप को अपडेट करते हुए चीन की सीमा से जुड़े 27 महत्वपूर्ण स्थानों को भारतीय नामों के साथ चिन्हित किया गया है।भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश में मैकमोहन रेखा से सटे कई विवादित और संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों को आधिकारिक ‘सर्वे ऑफ इंडिया’ के नक्शों में शामिल करने से भारत-चीन सीमा पर कई रणनीतिक दबाव बिंदु सामने आए हैं। इनमें एक ऐसा पहाड़ी इलाका भी शामिल है, जहां 1962 के युद्ध से पहले भारतीय सेना की एक अग्रिम चौकी हुआ करती थी।जिस युद्ध स्मारक को मैप में भारतीय नामों के साथ दर्शाया गया है, वह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद खास है, क्योंकि 1962 के युद्ध से पहले भारत ने यहां ‘माजा कैंप’ नाम से अपनी एक अग्रिम चौकी स्थापित की थी। युद्ध के बाद इसे खाली कर दिया गया और यह क्षेत्र विवादित हो गया। नवीनतम रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी सेना ने अब इस पहाड़ी इलाके में निर्माण कार्य कर लिया है।

अपडेट किए गए नक्शे में चार पहाड़ी दर्रे द्जो ला, रिजा ला, पुकुर ला और थग ला. थग ला खास को शामिल किया गया है। इसके अलावा सांबो सरोवर को भी भारतीय नाम के साथ नक्शे में दर्ज किया गया है। थग ला दर्रा वह जगह है, जहां 1962 के भारत-चीन युद्ध के शुरुआती चरण में लड़ाई हुई थी।बाकी 21 स्थानों में लॉन्गजू, माजा, बीसा, बड़ा कुंदुन, छोटा कुंदुन, धन बारी, प्रीतनगर, बुद्धमंदिर, जयरामपुर, तेरीतनगर, रामनगर, जसवंत गढ़, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैसाखी, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा और कामलंग नगर शामिल हैं। इसके अलावा शेर-ए-थापा मेमोरियल भी जोड़ा गया है।गौरतलब है कि एक दशक पहले रक्षा आकलन में अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगे छह विवादित और चार संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की गई थी, और चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया था। इन छह विवादित क्षेत्रों में ऊपरी सुबनसिरी में असाफिला, लोंगजू, बिसा और माजा तथा तवांग में तुलुंग ला और यांग्त्से शामिल थे।इनमें से आसफिला, लोंगजू, बिसा और माजा पर चीन का अवैध कब्जा है, जिसमें आसफिला अंदरूनी इलाके में स्थित है। लोंगजू, बिसा और माजा को अब भारत ने अपने क्षेत्र के रूप में मानचित्रित कर लिया है। मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इन नामों को आधिकारिक मानचित्रों में शामिल करने का उद्देश्य इन जगहों की सही पहचान बताना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों की आधिकारिक पहचान तय करना और भारत के प्रशासनिक रिकॉर्ड में उन्हें शामिल करना है।
