Sunday, September 6, 2026
Homechandigarhचंडीगढ़ में सीवर लाइन के लिए बगैर काम भुगतान, अब अफसरों को...

चंडीगढ़ में सीवर लाइन के लिए बगैर काम भुगतान, अब अफसरों को बचाने की जद्दोजहद; जूनियर्स पर दबाव

दैनिक जागो वर्ल्ड!चंडीगढ़

 नगर निगम चंडीगढ़ में अमृत योजना के तहत इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में कराए गए सीवर पाइपलाइन के काम में सामाने आई गड़बड़ी पर अफसरों को बचाया जा रहा है। जूनियर कर्मचारियों पर दबाव डाला जा रहा है कि वह यह लिखकर दें कि सर्वे की रिपोर्ट गलत तैयार हुई है जबकि वास्तविकता में रिपोर्ट सही है।जूनियर कर्मचारियों को कहा जा रहा है कि वह यह है लिखकर दें की सीवर पाइपलाइन अन्य जगह भी पड़ी है। 598 मीटर सीवर पाइपलाइन बिछाने के नाम पर भुगतान , जबकि मौके पर निरीक्षण में करीब 380 मीटर पाइपलाइन ही पाई गई है

कागजों और मौके पर किए गए काम में करीब 218 मीटर का अंतर सामने आया है। मामला सामने आने के बाद नगर निगम के चीफ इंजीीनियरन कार्यालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।चीफ इंजीनियर की ओर से 27 अगस्त को जारी पत्र में अधीक्षण अभियंता को मामले की व्यक्तिगत निगरानी में जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट तीन दिन के भीतर मुख्य अभियंता कार्यालय में जमा कराने को कहा गया है।जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि वास्तव में मौके पर कितनी पाइपलाइन बिछाई गई, माप पुस्तिका (एमबी) में कितनी मात्रा दर्ज की गई और ठेकेदार को किस मात्रा के आधार पर भुगतान किया गया।स्वीकृत एस्टीमेट से मौके के काम का होगा मिलानमुख्य अभियंता ने जांच के लिए कई बिंदु निर्धारित किए हैं। सबसे पहले स्वीकृत एस्टीमेट और डीएनआईटी में निर्धारित कार्यक्षेत्र की जांच होगी। इसके बाद स्वीकृत मात्रा की तुलना मौके पर किए गए वास्तविक कार्य से की जाएगी।माप पुस्तिका में दर्ज माप और उसके आधार पर तैयार किए गए बिलों तथा किए गए भुगतान का भी मिलान किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बिंदु 598 मीटर बनाम 380 मीटर का है।निगम संयुक्त रूप से दोबारा माप कर यह सत्यापित करेगा कि दोनों आंकड़ों में वास्तव में कितना अंतर है। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि कहीं स्वीकृत कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के अतिरिक्त कार्य तो नहीं कराया गया।जेई से लेकर एक्सईएन तक की भूमिका की जांचमामले में केवल काम की मात्रा ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी। आदेश में माप दर्ज करने, उसकी जांच करने, प्रमाणित करने और बिल पास करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं।इसके साथ ही माप पुस्तिका के संबंधित अंश, स्वीकृत प्राक्कलन, बिल और भुगतान विवरण तथा टेस्ट रिकॉर्ड सहित अन्य संबंधित दस्तावेज भी रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत करने होंगे।बिना मंजूरी अतिरिक्त काम हुआ तो कार्रवाईमुख्य अभियंता ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में स्वीकृत कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर बिना उचित अनुमति के काम कराया गया और उसके लिए भुगतान भी किया गया है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।ऐसे में यह भी स्पष्ट करना होगा कि अतिरिक्त मात्रा किस आधार पर तैयार की गई, किस अधिकारी ने इसकी अनुमति दी और भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया गया। रिपोर्ट में यदि किसी स्तर पर अनियमितता या विसंगति सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लागू नियमों के तहत प्रस्तावित अथवा आवश्यक कार्रवाई का भी उल्लेख करना होगा।आदेश की प्रतियां नगर निगम आयुक्त, मुख्य लेखा अधिकारी, संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और संबंधित कनिष्ठ व सहायक अभियंताओं को भी भेजी गई हअब तीन दिन में आने वाली जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि 598 मीटर और 380 मीटर के बीच का अंतर वास्तविक है या नहीं और यदि है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है

RELATED ARTICLES

Most Popular