दैनिक जागो वर्ल्ड किन्नौर

छह साल बाद भारत-तिब्बत (चीन) सीमा व्यापार फिर से शुरू हो गया है, जिसमें किन्नौर के व्यापारी 2.44 लाख रुपये का सामान लेकर लौटे हैं।

करीब छह वर्ष बाद शुरू हुए भारत-तिब्बत (चीन) सीमा व्यापार के तहत 16 सदस्यीय पहला व्यापारिक दल तिब्बत (चीन) से सामान लेकर सोमवार देर शाम हिमाचल के किन्नौर जिले के शिपकी ला लौट आया है।दल पहली अगस्त को गया था। सीमा पर आइटीबीपी, सीमा शुल्क विभाग और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी में व्यापारियों एवं उनके सामान की जांच की। व्यापारी चीन से अधिसूचित सूची के अंतर्गत चटाई, कंबल, जूते, पारंपरिक वस्तुएं, घड़ियां, क्राकरी, थर्मस सहित अन्य सामान लेकर लौटे हैं।कारोबारी चीन को अगली बार राजमाह व आयुर्वेदिक दवाएं भी बेचने के इच्छुक हैं। गुड़ व बिस्कुट का आयात भी कारोबारियों ने किया है। उपायुक्त किन्नौर अमित कुमार शर्मा ने बताया कि सीमा व्यापार के पहले चरण में 2.44 लाख रुपये का कारोबार हुआ है।पहले प्रति व्यापारी दो लाख रुपये तक व्यापार की सीमा निर्धारित थी, लेकिन वर्तमान में कस्टम विभाग ने इसे घटाकर एक लाख रुपये कर दिया है। व्यापारियों ने इस सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये प्रति व्यापारी करने की मांग उठाई है।

भारत से 36 प्रकार की वस्तुओं के निर्यात तथा चीन से अधिसूचित सूची के अनुसार वस्तुओं के आयात की अनुमति है। व्यापारियों के अगले दल को भेजने का निर्णय भारत-तिब्बत-चीन ट्रेड एसोसिएशन, स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय के बाद लिया जाएगा। उपायुक्त ने कहा कि व्यापारियों की ओर से प्राप्त सुझावों और मांगों को संबंधित विभागों एवं उच्च स्तर पर भेजा जाएगा।किन्नौर इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन ने राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर सीमा व्यापार को और अधिक प्रभावी एवं लाभकारी बनाने की मांग की है। एसोसिएशन ने प्रति व्यापारी व्यापार सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने, शिपकी ला तक मोटर योग्य सड़क के निर्माण, आयात-निर्यात की अधिसूचित वस्तुओं की सूची का विस्तार करने तथा व्यापारिक सुविधाओं के आधुनिकीकरण की मांग उठाई है।व्यापारियों ने निर्यात सूची में राजमाह, शहद, आयुर्वेदिक उत्पाद और कच्ची कपास को शामिल करने तथा आयात सूची में कास्मेटिक्स, सोलर उत्पाद, हस्तशिल्प, कृषि उपकरण, इलेक्ट्रानिक्स, हर्बल उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड जैसी वस्तुओं को जोड़ने का सुझाव दिया है। इसके अलावा शिपकी ला मार्ग से कैलास मानसरोवर यात्रा शुरू करने तथा पशुधन क्वारंटाइन एवं पशु स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की मांग भी की है।
