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जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियों की भर्ती व्यवस्था को बदलते समय के अनुरूप ढालने की जरूरत पर जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग (जJKPSC) ने गंभीर चिंता जताई है। आयोग ने अपनी 67वीं वार्षिक रिपोर्ट में अधिकांश विभागों के दशकों पुराने भर्ती नियमों को अप्रासंगिक बताते हुए उन्हें तत्काल अद्यतन करने की सिफारिश की है।आयोग का मानना है कि पुराने नियम न केवल नई विशेषज्ञताओं और बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप मानव संसाधन जुटाने में बाधा बन रहे हैं, बल्कि इनके कारण भविष्य में अदालती विवाद और मुकदमेबाजी की आशंका भी बढ़ती है।आयोग ने कहा है कि सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी परिवेश में तेजी से बदलाव आया है। शिक्षा, चिकित्सा विज्ञान और कंप्यूटर विज्ञान जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में सेवा नियमों में भी आवश्यक बदलाव कर नई विशेषज्ञताओं को समायोजित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।जेकेपीएससी ने भर्ती नियमों के मसौदे तैयार करने और आयोग को भेजने की प्रक्रिया में भी खामियां उजागर की हैं। आयोग के अनुसार कई प्रशासनिक विभाग अधूरे दस्तावेजों के साथ मसौदा नियम सहमति के लिए भेज देते हैं। इनमें तुलनात्मक विवरण, पदों के सृजन या समाप्ति से संबंधित आदेश तथा पदों के नाम में बदलाव या नए पद सृजित करने की स्थिति में वित्त विभाग की सहमति जैसे जरूरी दस्तावेज शामिल नहीं होते।आयोग ने नियमों में एकरूपता और प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भर्ती नियमों के मसौदे प्रस्तुत करने संबंधी चेकलिस्ट तैयार कर सभी विभागों को भेजी है। साथ ही, जिन भर्ती नियमों पर आयोग पहले ही अपनी सहमति दे चुका है, उन्हें बिना अनावश्यक देरी के अधिसूचित करने की मांग की गई है।आयोग ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा नियमों के तहत उसकी अनिवार्य सलाह लिए बिना सेवा नियमों में संशोधन नहीं किया जाना चाहिए। आयोग ने यह भी कहा है कि भर्ती नियमों में बदलाव के दौरान पदों के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
