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विधानसभा में अवैध खनन पर विपक्ष ने सरकार को घेरा। बाजवा ने अदालतों और जांच एजेंसी का हवाला दिया, जबकि अयाली ने कर्मचारियों व शिक्षकों की मांगें उठाईं।

पंजाब विधानसभा के शून्यकाल में अवैध खनन का मुद्दा सबसे ज्यादा गरमाया। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि एक दिन पहले सरकार ने पूरे सदन और पंजाब को भरोसा दिलाया था कि राज्य में कहीं भी अवैध खनन नहीं हो रहा।यदि सरकार अपने दावे पर कायम है तो सत्र समाप्त होने के बाद सभी दलों के विधायकों की हाउस कमेटी गठित कर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कराया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।बाजवा ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सतलुज नदी पर बने पुल को कथित नुकसान पहुंचाने वाले अवैध खनन मामले में पंजाब सरकार के रवैये पर असंतोष जताते हुए चार सप्ताह के भीतर नई प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले छह महीनों से सरकार की ओर से रिपोर्टें दाखिल की जा रही हैं, लेकिन उनमें कहीं भी ऐसी बात नहीं है, जिस पर सरकार अपनी पीठ थपथपा सके।

उन्होंने वर्ष 2023 में पठानकोट क्षेत्र में सामने आए कथित अवैध खनन के मामले का भी जिक्र किया। बाजवा ने आरोप लगाया कि एक अधिकारी को पहले बीडीपीओ, फिर डीडीपीओ और उसके बाद एडीसी (डेवलपमेंट) बनाया गया। उन्होंने कहा कि उसी अधिकारी ने बाद में खनिज संपदा वाली करीब 12 एकड़ सरकारी भूमि बेहद कम कीमत पर आवंटित कर दी।बाजवा ने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने 11 अगस्त 2023 को पंजाब के राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।बाजवा के बोलने के 3 मिनट 9 सेकेंड पूरे होने पर विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वह अपनी बात रख चुके हैं और अब अन्य सदस्यों को भी बोलने का अवसर दिया जाए। बाजवा ने आग्रह किया कि उनके पास न्यायालय और केंद्रीय जांच एजेंसी की गंभीर टिप्पणियां हैं, जिन्हें सदन के सामने रखना जरूरी है। इस पर स्पीकर ने उन्हें दो मिनट का अतिरिक्त समय दिया।अतिरिक्त समय में बाजवा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि जांच में जिन व्यक्तियों और संस्थाओं के यहां छापेमारी की गई, उनके खिलाफ बिना वैध अनुमति रेत और नदी तल की सामग्री का अवैध उत्खनन, खरीद, बिक्री और परिवहन करने के आरोप सामने आए हैं।साथ ही देय कर और रॉयल्टी का भुगतान भी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जांच में कुछ सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिन पर अवैध खनन को संरक्षण देने और रोकथाम के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाने का आरोप है, जिससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ।बाजवा ने सदन में ईडी की जांच में सामने आए श्री साईं स्टोन क्रशर और शिव शंकर स्टोन क्रशर का नाम भी लिया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी के अनुसार इनसे जुड़े मामलों में अवैध खनन, खरीद-बिक्री और परिवहन की जांच की जा रही है।उन्होंने यह भी कहा कि जांच में यह सामने आया है कि रात के समय बड़ी संख्या में ट्रक, टिप्पर और एक्सकेवेटर क्षेत्र में चलते रहे, जिनमें कुछ वाहनों पर नंबर प्लेट तक नहीं थीं। यह संगठित अवैध खनन की ओर संकेत करता है।नेता प्रतिपक्ष ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में लंबित जनहित याचिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट कहा है कि पठानकोट और गुरदासपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेषकर रावी नदी के आसपास होने वाला अवैध खनन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।अदालत ने यह भी कहा है कि ऐसी गतिविधियां मादक पदार्थों के तस्करों, आतंकियों और राष्ट्र विरोधी तत्वों की आवाजाही को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकती हैं। बाजवा ने कहा कि जब न्यायालय और केंद्रीय जांच एजेंसी दोनों गंभीर टिप्पणियां कर चुके हैं तो सरकार को इस पूरे मामले पर जवाब देना चाहिए।
