Sunday, July 12, 2026
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बंगाणा के जसाना गांव में स्व. देवराज शर्मा एवं रतनी देवी की पुण्य स्मृति पर श्रीराम कथा का भव्य आयोजन,हर दिन भोजन की विशेष व्यवस्था,

श्री राम कथा के तृतीय दिवस पर कथा व्यास आचार्य सुनील वशिष्ठ ने सुनाया राजा दक्ष, माता सती और शिव-विवाह का दिव्य प्रसंग,

बंगाणा

उपमंडल बंगाणा की ग्राम पंचायत जसाना के गांव जसाना में स्वर्गीय देवराज शर्मा एवं स्वर्गीय रतनी देवी की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच जारी है। कथा के तृतीय दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा स्थल पर पहुंचकर भगवान श्रीराम के नाम का स्मरण किया तथा कथा व्यास आचार्य श्री श्री सुनील वशिष्ठ के श्रीमुख से पौराणिक प्रसंगों का श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित किया।
इस धार्मिक आयोजन का आयोजन स्वर्गीय देवराज शर्मा एवं स्वर्गीय रतनी देवी के परिवार की ओर से श्रद्धापूर्वक किया जा रहा है। श्री राम कथा आयोजकों में खुशी राम शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी पवना देवी, मौजी राम एवं बिमला देवी, सोमदत्त शर्मा एवं स्नेहलता, मनोज कुमार एवं सुचेता शर्मा, अनिल कुमार शर्मा एवं पूजा शर्मा, महिंद्र शर्मा, मोनिका शर्मा, लक्की शर्मा एवं मोनिका शर्मा, विनय कुमार एवं पल्लवी शर्मा सहित शिवांश शर्मा, आयुष शर्मा, पयुष शर्मा, विनायक शर्मा, सुपार्थ शर्मा और वैष्णवी शर्मा सहित समस्त पारिवारिक सदस्य सेवा भाव से जुटे हुए हैं। परिवार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए बैठने, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी समुचित व्यवस्था की गई है। कथा के तृतीय दिवस पर कथा व्यास आचार्य श्री सुनील वशिष्ठ ने राजा दक्ष, उनकी सुपुत्री माता सती तथा भगवान शिव से जुड़े प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अहंकार मनुष्य के विवेक को नष्ट कर देता है, जबकि विनम्रता और भक्ति जीवन को श्रेष्ठ बनाती है। राजा दक्ष द्वारा भगवान शिव का अपमान और उसके बाद माता सती द्वारा अपने पति के सम्मान की रक्षा के लिए किए गए त्याग का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि यह कथा हमें आत्मसम्मान, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। आचार्य श्री श्री सुनील वशिष्ठ ने आगे भगवान शिव एवं माता पार्वती के पावन विवाह का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि शिव और शक्ति का यह दिव्य मिलन संपूर्ण सृष्टि के संतुलन का प्रतीक है। भगवान शिव त्याग, तपस्या और करुणा के स्वरूप हैं, जबकि माता पार्वती श्रद्धा, शक्ति और अटूट विश्वास की प्रतिमूर्ति हैं। उन्होंने कहा कि शिव-विवाह केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार के लिए आदर्श जीवन, समर्पण और पारस्परिक सम्मान का संदेश देता है। कथा व्यास ने अपने प्रवचनों में कहा कि श्रीराम कथा और सनातन धर्म के पौराणिक प्रसंग मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। कथा श्रवण से मन की अशांति दूर होती है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा व्यक्ति के भीतर सेवा, प्रेम, करुणा और सदाचार की भावना विकसित होती है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में धर्म, सत्य और संस्कारों को अपनाकर समाज में सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करें। कथा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का वर्णन सुनकर पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु पूरे समय भक्ति रस में सराबोर रहे और कथा के प्रत्येक प्रसंग को श्रद्धा एवं एकाग्रता के साथ सुना। कथा के उपरांत सामूहिक आरती का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने भाग लेकर विश्व कल्याण, परिवार की सुख-समृद्धि तथा दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। धार्मिक आयोजन में आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। भजन-कीर्तन और धार्मिक वातावरण से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को विशाल भंडारे का प्रसाद भी वितरित किया गया। बही
पारिवारिक सदस्यों ने बताया कि स्वर्गीय देवराज शर्मा एवं स्वर्गीय रतनी देवी की पुण्य स्मृति में आयोजित इस श्रीराम कथा का उद्देश्य केवल दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करना ही नहीं, बल्कि समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना भी है। उन्होंने कथा में पहुंचकर धर्म लाभ अर्जित करने वाले सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए आगामी दिनों में भी अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण करने का आग्रह किया। श्रद्धा, सेवा और भक्ति से परिपूर्ण यह आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का संदेश दे रहा है।

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