दैनिक जागो वर्ल्ड!आगरा

आगरा स्मार्ट सिटी में लगे पैनिक बटन काम नहीं कर रहे हैं, आपातकाल में दबाने पर भी कंट्रोल रूम से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती। ये बटन सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं, जिससे नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। एमजी रोड स्थित सेंट जोंस चौराहा। आपातकालीन सहायता के लिए पैनिक बटन लगा है। सोमवार दोपहर दो बजे पैनिक बटन का एक राहगीर ने प्रयोग किया। लाल बटन जल रही थी। जैसे ही बटन को दबाया और हेलो बोला, कुछ देर इंतजार किया। मगर, कंट्रोल रूम से कोई आवाज नहीं आई। इसी तरह सूरसदन तिराहा पर सात साल पूर्व तिराहा के एक कोने में पैनिक बटन लगा था। दोपहर ढाई बजे पैनिक बटन को दबाया गया। हेलो…हेलो दो से तीन बार बोला गया। एक बार भी कंट्रोल रूम से आवाज नहीं आई। तीन से चार मिनट तक इंतजार किया गया फिर परेशान होकर चला गया।

खंदारी चौराहा पर छह साल पूर्व पैनिक बटन लगा था। एक राहगीर ने अपनी परेशानी बताने के लिए पैनिक बटन का प्रयोग किया। बटन की बत्ती जल रही थी लेकिन कंट्रोल रूम से कोई भी आवाज नहीं आई। दोपहर दो बजे न ही राहगीर की बात को सुना गया।नालबंद चौराहा पर भी साढ़े छह साल पूर्व पैनिक बटन लगा था। दोपहर ढाई बजे एक राहगीर ने बटन को दबाया। लाल बटन को दबाने पर हेलो कहा लेकिन यहां भी कंट्रोल रूम से कोई भी आवाज नहीं आई।
शहर में पैनिक बटन किस तरीके से कार्य कर रहे हैं। इसके यह तो चार ही उदाहरण हैं। अगर किसी महिला या फिर पर्यटक को अचानक मदद की जरूरत पड़ जाए तो सुरक्षा भगवान भरोसे हैं। जब दिन में कंट्रोल रूम से कोई आवाज या फिर जवाब नहीं आता है तो रात की स्थिति क्या होगी। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।आगरा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में वर्ष 2019 में 43 स्थलों पर पैनिक बटन लगना शुरू हुए थे। सबसे पहले सूरसदर तिराहा, एमजी रोड में बटन लगा था। पैनिक बटन को 13 नवंबर 2019 को शुरू किया गया था फिर बारी-बारी से सभी बटन शुरू हुए थे। नगर निगम कार्यालय में 283 करोड़ रुपये से एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया गया था।पैनिक बटन लगाने का मकसद आपातकाल में फंसे किसी पर्यटक या फिर महिला और नागरिक की मदद करना था। मगर, पैनिक बटन ठीक तरीके से कार्य नहीं कर रहे हैं।
