Wednesday, October 21, 2026
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हिमाचल के लिए आफत बन सकती हैं 5 ग्लेशियल झीलें, IIT मंडी के शोध से खुले राज, 2 जिलों के ये क्षेत्र अतिसंवेदनशील

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आईआईटी मंडी के शोधार्थियों ने खुलासा किया है कि हिमाचल प्रदेश की बर्फीली चोटियों पर स्थित ग्लेशियल झीलें जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघल रही हैं।। हिमाचल प्रदेश की बर्फीली चोटियों पर एक अदृश्य संकट पल रहा है, जो जल प्रलय का रूप ले सकता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मंडी के शोधार्थियों ने अध्ययन में पाया है कि जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघल रहे हैं। इसके कारण बनी झीलें वाटर बम से कम नहीं हैं। वैज्ञानिक आकलन के अनुसार, हिमाचल के पर्वतीय क्षेत्रों में नौ झीलों को अति उच्च जोखिम श्रेणी में रखा गया है। 
इनमें से पांच ग्लेशियल झीलों की स्थिति इतनी खतरनाक हो चुकी है कि उनके कभी भी फटने की आशंका ने वैज्ञानियों और प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। शोध के अनुसार, लाहुल स्पीति और किन्नौर जिलों में स्थित इन झीलों का दायरा वर्ष 2015 के मुकाबले तेजी से फैलता जा रहा है।164 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली समुद्र टापू झीलसमुद्र टापू झील 164.46 हेक्टेयर क्षेत्र में फैल चुकी है, जिसमें लगभग 69.79 मिलियन घनमीटर पानी का भंडार है। 2015 से 2025 के एक दशक में इस झील के क्षेत्रफल में 2,96,564 वर्गमीटर की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। 110.84 हेक्टेयर में फैली गेपांग गथ झील में करीब 39.86 मिलियन घनमीटर पानी है, जो निचले क्षेत्रों के लिए किसी बड़े खतरे की घंटी से कम नहीं है।

शोध में स्पष्ट किया गया है कि ये झीलें ठोस चट्टानों पर नहीं बल्कि अस्थिर मलबे के प्राकृतिक बांधों पर टिकी हैं। तापमान वृद्धि और वर्षा के कारण यदि यह मलबा फिसलता है, तो चंद मिनट में तबाही आ सकती है। समुद्र टापू और गेपांग गथ झीलों के ठीक नीचे बसे सिस्सु और छतडू गांव पर बड़ा संकट हैकिन्नौर की कशांग झील (क्षेत्रफल 35.35 हेक्टेयर) के ठीक नीचे इंटीग्रेटेड कशांग हाइड्रो डैम है, जो खतरे को और बढ़ा देता है। इसके दायरे में पवारी गांव, रिकांगपिओ और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग पांच भी आते हैं। कालीकुंड और चंद्रताल झीलें भी अतिसंवेदनशीलइसके अलावा चंबा-लाहुल सीमा पर स्थित कालीकुंड और चंद्रताल झीलें भी इसी अति संवेदनशील दायरे में चिह्नित की गई हैं। वासुकी, सुरई, क्या त्सो और योचे झील भी इसी श्रेणी में शामिल है। इन सभी झीलों के रडार में 20 से अधिक पुल, कई गांव और शिक्षण संस्थान शामिल हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार समय रहते इन क्षेत्रों में आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम और पुख्ता सुरक्षा प्रबंध किए जाएं।।

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