शिमला-टीना ठाकुर

प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महासचिव डॉ. सिकंदर कुमार ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को असंवैधानिक तरीके से टालने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार अपनी गिरती लोकप्रियता और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते जनाक्रोश से घबराकर लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई पंचायतों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। डॉ. सिकंदर कुमार ने जारी बयान में कहा कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार जानबूझकर नए चुनावों की अधिसूचना जारी नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव कराने के बजाय ‘प्रशासक राज’ के माध्यम से पंचायतों को पिछले दरवाजे से नियंत्रित करना चाहती है, जो सीधे तौर पर पंचायती राज व्यवस्था और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह कदम देश के संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि लोक तंत्र की मजबूती का आधार ग्राम पंचायतें होती हैं और यदि पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराए जाते, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा आघात पड़ता है। डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में विफलताओं का अंदेशा है, इसलिए वह जनता के बीच जाने से बचने के लिए चुनाव प्रक्रिया को टाल रही है। डॉ. सिकंदर कुमार ने सरकार पर आरक्षण रोस्टर में मनमाने ढंग से बदलाव करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी सुविधा के अनुसार रोस्टर में परिवर्तन कर रही है, ताकि भाजपा समर्थित उम्मीदवारों और सक्षम नेतृत्व को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जा सके। उन्होंने इस कदम को ‘प्रशासनिक तानाशाही’ करार देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के पास जनता को दिखाने के लिए कोई ठोस उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं को 1500 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन अब तक यह वादा पूरा नहीं हो सका है। इसके अलावा युवाओं को रोजगार देने के मामले में भी सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास से जुड़े कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं और फंड जारी करने में भी देरी की जा रही है। डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पंचायत चुनावों से भाग रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र को ‘होल्ड’ पर रख दिया है और चुनाव टालने के लिए अलग-अलग बहाने बनाए जा रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के बीच जाने से सरकार ज्यादा समय तक नहीं बच सकती और भाजपा हर बूथ स्तर पर इस सरकार की नीतियों के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाने के लिए तैयार है।
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रोस्टर के नाम पर दलितों और पिछड़े वर्गों के हक पर डाका डाला जा रहा है। डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि सरकार वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर न्याय का दिखावा कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि उन सीटों को निशाना बनाया जा रहा है, जहां भाजपा समर्थित ओबीसी और अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवार मजबूत स्थिति में हैं। डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि सुक्खू सरकार विकास के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है और अब वह रोस्टर में हेराफेरी कर पंचायतों पर जबरन कब्जा करने की योजना बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ‘मित्र-मंडली’ के सहारे काम कर रही है और जनहित की योजनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता अब सरकार की नीतियों को समझ चुकी है और आने वाले समय में इसका जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी नहीं करती है, तो भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से जन आंदोलन छेड़ने पर विचार करेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखते हुए समय पर पंचायत चुनाव कराए जाएं, ताकि जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिल सके।



