Sunday, April 19, 2026
HomeHImachal NewsKangraमहादेव मेले में पहुंचे विपिन परमार, परंपरा और राजनीति का दिखा संगम

महादेव मेले में पहुंचे विपिन परमार, परंपरा और राजनीति का दिखा संगम

पालमपुर-राकेश कुमार

सुलह विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत मरुह्न में वैशाखी के पावन अवसर पर ऐतिहासिक भेङू महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित तीन दिवसीय रली-छिंज मेला वीरवार को हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ। इस मेले में क्षेत्र सहित दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं और दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा।
मेले के समापन अवसर पर सुलह के विधायक विपिन सिंह परमार अपनी धर्मपत्नी श्रीमती शर्मिला परमार सहित मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहे। मेला कमेटी एवं स्थानीय लोगों द्वारा उनका पारंपरिक वाद्य यंत्रों और भव्य शोभायात्रा के साथ स्वागत किया गया तथा पूरे सम्मान के साथ मंच तक पहुंचाया गया। इस अवसर पर मेला कमेटी ने मुख्यातिथि को स्मृति चिन्ह, आकर्षक पेंटिंग एवं पारंपरिक तलवार भेंट कर सम्मानित किया।
अपने संबोधन में विधायक विपिन सिंह परमार ने मेले के सफल आयोजन के लिए मेला कमेटी एवं क्षेत्रवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पारंपरिक मेले हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक हैं और इनसे आपसी भाईचारे,एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है।उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहन एवं हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
मेले के दौरान आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। तीन दिनों तक चली इस प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश सहित आसपास के राज्यों से आए नामी पहलवानों ने जोरदार मुकाबले पेश कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। बड़ी कुश्ती में विजेता पहलवान को ₹31,000 तथा उपविजेता को ₹21,000 की नकद पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में मेला कमेटी के चेयरमैन मोनी राम,चंद्र किशोर,कैशियर वेद प्रकाश,मंदिर पुजारी बाबा ब्रह्मदास निर्वाण,हितेश नाग,सुशील शर्मा, देश राज, सुदर्शन धीमान, पवन, राम पटियाल सहित समस्त सदस्यों का विशेष योगदान रहा। स्थानीय प्रशासन एवं स्वयंसेवकों ने भी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में सराहनीय भूमिका निभाई।
मेले के सफल आयोजन से न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को नई ऊर्जा मिली, बल्कि युवाओं में भी पारंपरिक खेलों और आयोजनों के प्रति उत्साह देखने को मिला।यह मेला क्षेत्र की आस्था,संस्कृति और आपसी सद्भाव का प्रतीक बनकर एक बार फिर अपनी अलग पहचान स्थापित करने में सफल रहा।

RELATED ARTICLES

Most Popular