Sunday, July 12, 2026
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दूध उत्पादकों के हक में प्रेम सिंह औजला की बड़ी मुहिम, मुख्यमंत्री ने लिया कड़ा संज्ञान, निदेशक पशुपालन को तुरंत कार्रवाई के दिए आदेश

​ऊना/शिमला

हिमाचल प्रदेश के किसानों और पशुपालकों की गंभीर समस्याओं को लेकर क्षेत्र के प्रमुख नेता एवं जनजातीय विकास विभाग (हरोली) के सदस्य प्रेम सिंह औजला ने एक बार फिर पुरजोर आवाज उठाई है। औजला द्वारा सीधे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को लिखे गए तीखे और तथ्यों से भरे पत्र के बाद राज्य सरकार तुरंत हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए पशुपालन विभाग के निदेशक को पत्र जारी कर सभी मसलों की गहन जांच करने और तुरंत उचित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में पूर्व प्रधान एवं पूर्व बीडीसी सदस्य प्रेम सिंह औजला ने प्रदेश के लाखों पशुपालकों की पीड़ा, आक्रोश और निराशा को उजागर किया था। औजला ने सरकार को याद दिलाया कि सत्ता में आने से पूर्व कांग्रेस ने गाय का दूध ₹80 प्रति किलो और भैंस का दूध ₹100 प्रति किलो की दर से खरीदने का वायदा किया था। हालांकि, हालिया बजट में सरकार ने गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹61 प्रति किलो घोषित किया, जिससे किसानों में एक उम्मीद जगी थी, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है।
​औजला ने तथ्यों के साथ बात रखते हुए बताया कि बजट में ₹61 प्रति किलो MSP घोषित होने के बावजूद, आज ग्रामीण स्तर की डेयरियों में पशुपालकों को मात्र ₹40 प्रति किलो (4 फैट और 8.50 SNF के आधार पर) का भुगतान किया जा रहा है। सरकार द्वारा घोषित MSP धरातल से पूरी तरह गायब है। उन्होंने सरकार द्वारा जनता से वसूले जा रहे ‘मिल्क सेस’ पर भी बड़ा सवाल दागा और कहा कि आखिर मिल्क सेस के माध्यम से इकट्ठा हुआ यह करोड़ों रुपया कहाँ जा रहा है? यदि यह पैसा सीधे दूध उत्पादक किसानों के कल्याण और उन्हें सही मूल्य देने पर खर्च नहीं हो रहा, तो इस सेस को वसूलने का क्या औचित्य है? आज पशु आहार (फीड), खल, हरा चारा, तूड़ी, तारामीरा, मिनरल मिक्सचर और पशु चिकित्सा दवाइयों के दाम आसमान छू रहे हैं। लागत दोगुनी-तिगुनी हो चुकी है, लेकिन दूध का दाम पिछले लंबे समय से मात्र ₹40 पर अटका हुआ है, जिससे पशुपालक भारी कर्ज के जाल में फंस रहे हैं। उचित मूल्य न मिलने के कारण युवा पीढ़ी पुश्तैनी डेयरी व्यवसाय को छोड़कर फैक्ट्रियों में कम वेतन पर मजदूरी करने को मजबूर हो रही है, जिससे बेरोजगारी भी बढ़ रही है।
​प्रेम सिंह औजला ने पत्र में इस बात पर भी गहरा खेद व्यक्त किया था कि इस गंभीर मामले को लेकर वे कुछ महीने पहले स्वयं माननीय मुख्यमंत्री और माननीय पशुपालन मंत्री श्री चंदर कुमार जी के संज्ञान में ला चुके थे, यहाँ तक कि मिल्कफेड के डायरेक्टर को भी पत्र लिखा गया था, लेकिन अधिकारियों की शिथिलता के कारण धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। औजला द्वारा वर्तमान सरकार के कार्यकाल के बचे हुए डेढ़ साल का हवाला देते हुए दिए गए इस कड़े पत्र का व्यापक असर हुआ है। मुख्यमंत्री के अंडर सेक्रेटरी की ओर से 19 जून 2026 को एक आधिकारिक पत्र संख्या Secy/CM-A0202/2022-DEP-B-253785 जारी कर निदेशक (पशुपालन विभाग), शिमला को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने और कड़ी कार्रवाई करने को कहा गया है। इस पत्र की प्रतिलिपि सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु माननीय पशुपालन मंत्री श्री चंदर कुमार और मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक को भी भेजी गई है। प्रेम सिंह औजला की इस बड़ी कामयाबी से प्रदेश के पशुपालकों और किसानों में न्याय की आस बंधी है। औजला ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि समय रहते किसानों को दूध का सही हक नहीं मिला और बजट में घोषित ₹61 की MSP तुरंत प्रभाव से ग्रामीण स्तर की डेयरियों पर लागू नहीं की गई, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।

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