Sunday, September 6, 2026
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झारखंड में सरकारी कर्मियों के नाम बने राशन कार्ड, पोस्टल डिपार्टमेंट के भी सैकड़ों लोग; जल्द हटाने का मिला आदेश

दैनिक जागो वर्ल्ड झारखंड

झारखंड में 1272 सरकारी कर्मियों और 808 डाक विभाग से जुड़े लोगों के नाम पर राशन कार्ड पाए गए हैं, जिन्हें अपात्र घोषित किया गया है। इन सभी के नाम 25 अगस्त तक लाभार्थियों की सूची से हटाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें रांची में सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।

झारखंड में राशन कार्ड के नाम पर गड़बड़ियों की लंबी सूची देखकर यह अनुमान लगाना आसान है कि यहां के सरकारी कर्मियों को भी राशन कार्ड को लेकर नियमों की पूरी जानकारी नहीं है।कहीं ना कहीं यही कारण है कि राज्य के 1272 सरकारी कर्मियों ने अपने नाम पर राशन कार्ड ले रखा है। दूसरी ओर, पाेस्टल डिपार्टमेंट के भी आठ सौ से अधिक कर्मियों के नाम राशन कार्डों में दर्ज है।गलत ढंग से राशनकार्ड बनवाले लोगों की सर्वाधिक संख्या राजधानी रांची में है। राज्य के अन्य जिलों में लोगों के बीच जागरूकता की कमी को कारण माना जा सकता है, राजधानी रांची में तो ऐसा नहीं होना चाहिए।यही हाल बोकारो, धनबाद जैसे प्रमुख शहरों का भी है। कुल मिलाकर झारखंड में 1272 ऐसे लोगों के नाम राशन कार्ड होने के प्रमाण मिले हैं, जिनका नाम सरकारी कर्मियों में दर्ज है और हर माह इनके खाते में पीएफ की कटौती की राशि जमा होती है।

दूसरी ओर, डाक विभाग के कर्मी भी कहां पीछे रहनेवाले हैं। डाक विभाग के उन एजेंटों को डाक कर्मी का दर्जा प्राप्त है जो नियमित तौर पर आम लोगों का खाता डाकघरों में खुलवाते हैं और उन्हें डाकघर में राशि जमा करने के लिए प्रेरित करते हैं। इस क्रम में हजारों रुपये का कमीशन प्राप्त होता है।इनका कमीशन इतना हो जाता है कि इनकी गिनती गरीबों में नहीं हो। झारखंड में ऐसे लोगों की संख्या 808 है। विभागीय सचिव ने इनके नाम को लाभुकों की सूची से 25 अगस्त तक बाहर करते हुए विभाग को सूचित करने का निर्देश दिया है।ऐसा नहीं होने की स्थिति में भारत सरकार ने इन लोगों के नाम से जारी आवंटन को स्वत: रोकने का निर्देश दिया है।

जिलासरकारी कर्मीपोस्टल कर्मी
बोकारो8156
चतरा4627
देवघर6530
धनबाद12364
दुमका3749
पूर्वी सिंहभूम6142
गढ़वा2525
गिरिडीह12170
गोड्डा2119
गुमला1916
हजारीबाग11536
जामताड़ा3521
खूंटी1012
कोडरमा5114
लातेहार1019
लोहरदगा1518
पाकुड़39
पलामू8178
रामगढ़1616
रांची265116
साहिबगंज198
सरायकेला-खरसावां2120
सिमडेगा1410
पश्चिमी सिंहभूम1833
कुल1272808

लातेहार का एक मामला अपनेआप में अनोखा है। एक सरकारी सेवक की पहली पत्नी की मौत के बाद उसके दाे-दो बच्चे अपने दादा-दादी के साथ रह रहे हैं। अब क्योंकि बच्चे के अभिभावक का नाम सरकारी सेवक में शामिल है और इस आधार पर उसे राशन की सुविधा नहीं दी जा सकती है।समस्या यह भी है कि पिता ने दूसरी शादी करने के बाद इसकी जानकारी स्वयं नहीं दी और ना ही बच्चों के माध्यम से सरकार तक यह जानकारी पहुंच पाई। ऐसे में नाम काटने के अलावा कोई चारा नहीं है।

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