Sunday, September 6, 2026
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हिमाचल में मॉनसून का कहर, 47 दिनों में 183 मौतें; नुकसान 972 करोड़ के पार

दैनिक जागो वर्ल्ड हिमाचल

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून ने 47 दिनों में भारी तबाही मचाई है, जिसमें 183 लोगों की मौत हुई और राज्य को 972 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ है।हिमाचल प्रदेश में इस साल मॉनसून की बारिश भारी तबाही लेकर आई है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 47 दिनों (30 जून से 15 अगस्त) के भीतर बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं के कारण 183 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

औसतन देखें तो राज्य में हर दिन करीब 4 लोगों की मौत दर्ज की गई है। इसके अलावा, राज्य को अब तक लगभग 972.64 करोड़ रुपये (97,263.91 लाख रुपये) का भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है।

हादसों और आपदाओं की वजह

कुल 183 मौतों में से 79 लोगों की जान प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूस्खलन, डूबने, करंट लगने और सांप के काटने से गई। इनमें से सबसे ज्यादा 27 मौतें ऊंची चट्टानों या पेड़ों से गिरने और 14 मौतें लैंडस्लाइड के कारण हुईं। वहीं, खराब मौसम और फिसलन की वजह से हुए सड़क हादसों में 104 लोगों की जान चली गईप्राकृतिक हादसों में सबसे ज्यादा 14 मौतें लाहौल-स्पीति में हुईं, जबकि कांगड़ा में 13 और शिमला में 11 लोगों की जान गई। सड़क दुर्घटनाओं के मामले में चंबा और सिरमौर सबसे आगे रहे, जहां 16-16 मौतें दर्ज हुईं। कुल्लू में हादसे के कारण 14 लोगों की मौत हुई।

आपदा की इस मार में 291 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि 31 लोग अभी भी लापता हैं। इंसान ही नहीं, बेजुबान जानवरों पर भी इसका गहरा असर पड़ा है—732 से अधिक मवेशी और 225 पोल्ट्री पक्षी इस दौरान मारे गए हैं।लोक निर्माण विभाग (PWD): सड़कों और पुलों के टूटने से PWD को अकेले 733.95 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
जल शक्ति विभाग: पानी की आपूर्ति प्रभावित होने से विभाग को करीब 216.40 करोड़ रुपये की क्षति पहुंची।
बिजली विभाग: बिजली के ढांचे को लगभग 5.30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
निजी संपत्ति: 83 मकान पूरी तरह से जमींदोज हो गए, जबकि 242 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। 260 पशु शेड भी तबाह हुए हैं। पीड़ित परिवारों की मदद के लिए सरकार ने अब तक 5.92 करोड़ रुपये की राहत राशि मंजूर की है।

मंडी जिला इस पूरी तबाही का मुख्य केंद्र बना हुआ है। राज्य भर में बंद पड़ी 103 सड़कों में से 43 अकेले मंडी की हैं (कुल्लू में 32 और चंबा में 8 सड़कें बंद हैं)। इसके अलावा, 46 ट्रांसफार्मर खराब होने से कई इलाकों में अंधेरा छाया है, जिनमें से 39 मंडी के हैं। राज्य में ठप पड़ीं 221 पानी की योजनाओं में से 209 सिर्फ मंडी जिले की हैं।

फिलहाल राहत और बचाव दल लगातार रास्ते खोलने, बिजली बहाल करने और पीने के पानी की सप्लाई शुरू करने के काम में जुटे हुए हैं।

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