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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पंचायत चुनाव जीतने वाली आशा कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें अपना कार्यकाल पूरा करने की अनुमति दी है, यह फैसला रीना देवी व अन्य की याचिका पर आया है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पंचायत चुनाव जीतने वाली आशा कार्यकर्ताओं को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि जो आशा कार्यकर्ता पंचायत चुनाव में चुनी गई हैं, उन्हें नियमानुसार कार्यकाल पूरा करने की अनुमति दी जाएगी। यह फैसला न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने रीना देवी और अन्य द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए सुनाया। कोर्ट ने कहा, अब मामले के गुण-दोष पर गहराई से जाने की आवश्यकता नहीं है और न्याय के हित में इन सफल उम्मीदवारों को उनके पद का कार्यकाल पूरा करने दिया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार के उस आदेश की वैधता पर अदालत ने कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है और इस कानूनी मुद्दे को भविष्य के लिए खुला रखा है। यह आदेश मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया है, इसलिए इसे भविष्य में किसी अन्य मामले के लिए कानूनी नजीर के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।मई में अयोग्य घोषित कर दिया थाविवाद तब शुरू हुआ था जब दो मई 2026 को सरकारी स्पष्टीकरण जारी कर आशा कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ सात आशा कार्यकर्ताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

उनका तर्क था कि वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित रूप से कार्य करती हैं, इसलिए वे किसी नियमित सरकारी सेवा या रोजगार के दायरे में नहीं आती हैं। हाई कोर्ट की रोक के बाद लिया था चुनाव में भागइससे पहले छह मई 2026 को हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सरकार के उस प्रतिबंधात्मक आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने चुनाव में भाग लिया। इनमें से तीन याचिकाकर्ता रीना देवी, चंद्रेश कुमारी और कमला देवी चुनाव में विजयी रहीं।
