Sunday, September 6, 2026
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उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों का खतरा! वसुंधरा ताल टूटी तो 10 मिनट में मचाएगी तबाही… लगेंगे अर्ली वॉर्निग सिस्टम

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उत्तराखंड सरकार उच्च हिमालयी हिमनद झीलों से संभावित खतरे की निगरानी के लिए सीबीआरआई रुड़की के सहयोग से ‘ग्लोफ’ मॉनिटरिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित कर रही हैराज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद हिमनद झीलों से संभावित खतरे को लेकर निगरानी व चेतावनी प्रणाली मजबूत की जा रही है।इसी कड़ी में राज्य सरकार अब केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की के सहयोग से हिमनद झीलों में ग्लोफ (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड) मानीटरिंग एंड अर्ली वार्निग सिस्टम स्थापित करने जा रही है।।

सीबीआरआई ने मौसम के अनुकूल रहने पर 20 से 30 सितंबर के बीच चमोली जिले के अति संवेदनशील वसुंधरा ताल (झील) में पहला सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा है।इस अत्याधुनिक प्रणाली के जरिये झील में होने वाली किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना एक से दो मिनट के भीतर कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी। झील में हिमखंड टूटकर गिरने, जलस्तर बढ़ने या झील का बांध टूटने जैसी स्थिति में वहां स्थापित सेंसर तत्काल इसका डाटा भेजेंगे।

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