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इसरो, एनआईटी राउरकेला और टी बोर्ड ने ‘चायांकन’ परियोजना के तहत चाय बागानों की निगरानी के लिए एक त्रिपक्षीय समझौता किया है।सुबह की जिस प्याली से भारत की दिनचर्या शुरू होती है, उस चाय की गुणवत्ता और पैदावार को अब अंतरिक्ष से नियंत्रित और संरक्षित किया जाएगा।जलवायु परिवर्तन, कीटों के हमले और उपज में अनिश्चितता जैसी सदियों पुरानी चुनौतियों को मात देने के लिए देश के तीन प्रमुख संस्थानों ने एक ऐतिहासिक और भविष्योन्मुखी तकनीकी गठजोड़ किया है।नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) राउरकेला, इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) और वाणिज्य मंत्रालय के अधीन टी बोर्ड इंडिया ने एक महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की नींव रखी है, जिसे चायांकन नाम दिया गया है।यह त्रिपक्षीय समझौता भारतीय कृषि में डेटा-संचालित क्रांति का नया अध्याय है। यह तीन वर्षीय एडवांस रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पारंपरिक कृषि को अत्याधुनिक डेटा साइंस से जोड़ने का एक सटीक ब्लूप्रिंट है।

अप्रैल 2026 में शुरू हुए इस मिशन के तहत सैटेलाइट और ड्रोन्स (यूएवी) से मिलने वाले रिमोट सेंसिंग डेटा को चाय बागानों के जमीनी आंकड़ों के साथ सिंक्रनाइज किया जाएगा।मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जटिल एल्गोरिदम यह तय करेंगे कि किस बागान की सेहत कैसी है, भविष्य में उपज कितनी होगी और सबसे महत्वपूर्ण कौन सी बीमारी या कीट कब हमला कर सकते हैं।नुकसान से पहले किसानों को अलर्टयह एक ऐसी अचूक पूर्व चेतावनी प्रणाली होगी, जो नुकसान होने से पहले ही किसानों और हितधारकों को अलर्ट कर नीति-निर्माताओं को ठोस कदम उठाने का समय देगी।कोलकाता स्थित आरआरएससी-ईस्ट (एनआरएससी) में 27 अगस्त 2026 को इस त्रिपक्षीय एमओयू ने औपचारिक रूप लिया।इस तकनीकी महात्वाकांक्षा की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके साक्षी इसरो-एनआरएससी के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान, एनआईटी राउरकेला के निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव और टी बोर्ड के निदेशक (चाय विकास) एस. सुंदरराजन जैसे शीर्ष रणनीतिकार बने।
