दैनिक जागो वर्ल्ड!गोरखपुर

बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर में बच्चों का उपचार तो बेहतर है, लेकिन कॉलेज प्रशासन की अनदेखी से व्यवस्थाएं बदहाल हो गई हैं। एसटीपी और पांच मोटर खराब होने से परिसर में गंदा पानी जमा है, शौचालय बंद हैं और लिफ्ट भी ठप है, जिससे मरीजों को संक्रमण का खतरा है।बीआरडी मेडिकल कालेज में प्रदेश का माडल बाल रोग विभाग है। बच्चों का बेहतर उपचार हाे रहा है लेकिन व्यवस्था बदहाल है। कालेज प्रशासन द्वारा समस्याओं की अनदेखी किए जाने से समस्याएं विकराल रूप में खड़ी हो गईं। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) खराब हुआ, एक-एक कर परिसर से पानी को बाहर निकालने वाले पांच मोटर खराब हो गए।समस्या का समाधान कराने की बजाय बाल रोग चिकित्सा संस्थान की इमरजेंसी के शौचालय बंद कर दिए गए। रोगियों-तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई लेकिन कालेज प्रशासन का ध्यान इस तरफ नहीं गया। जब दैनिक जागरण ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाना शुरू किया तो प्रबंधन की नींद टूटी और मरम्मत शुरू हुई।

इन सभी समस्याओं ने एक साथ सिर नहीं उठाया। धीरे-धीरे एक-एक कर मोटर खराब हुए। उन्हें बनवाया ही नहीं गया। लगभग तीन साल से मोटर खराब होने का सिलसिला चल रहा है। जब पांचवां मोटर भी खराब हो गया और परिसर में गंदा पानी फैलने लगा, लिफ्ट के बेसमेंट में पानी घुस गया, लिफ्ट बंद हो गई। तब भी कालेज प्रशासन का ध्यान उस तरफ नहीं गया। सबसे गंभीर समस्या सीवरेज व्यवस्था की है।मोटर खराब होने के कारण गंदा पानी एसटीपी तक नहीं पहुंच पा रहा है। नतीजा यह है कि शौचालय से निकलने वाला पानी नालियों और अन्य रास्तों से बहकर परिसर में जमा हो रहा है। जगह-जगह गंदा पानी और उससे उठती दुर्गंध मरीजों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। छोटे बच्चों को उपचार के लिए गोद में लेकर आने वाले अभिभावकों को भी इसी गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है।बाल रोग संस्थान में भर्ती बच्चों में बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है, जो पहले से संक्रमण, निमोनिया, दस्त या दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर में गंदा पानी जमा होना और उसी रास्ते से मरीजों का आवागमन होना संक्रमण नियंत्रण के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है। लोग जिस अस्पताल में बच्चों को संक्रमण से बचाने की उम्मीद लेकर आते हैं, वहां अस्पताल के भीतर ही गंदगी और दुर्गंध से सामना करना पड़ रहा है।मरीजों को वार्ड तक पहुंचाने वाले रास्ते पर गंदा पानी जमा होने से तीमारदारों को बच्चों को संभालकर ले जाना पड़ता है। छोटे बच्चों के फिसलने और गंदे पानी के संपर्क में आने का खतरा भी बना रहता है। गंभीर हालत वाले बच्चों के लिए यह स्थिति और परेशानी बढ़ाने वाली है। अस्पताल में आने वाले कई बच्चे कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के होते हैं, इसलिए उनमें अतिरिक्त संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है।अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। सीवरेज की समस्या के कारण बेसमेंट तक गंदा पानी पहुंचने की स्थिति सामने आई है। इससे लिफ्ट के संचालन और सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। अस्पताल में छोटे बच्चों, नवजातों और गंभीर मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में लिफ्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।ऐसे में लिफ्ट के खराब या असुरक्षित होने से मरीजों और तीमारदारों की परेशानी और बढ़ गई है। गंभीर बच्चों को स्ट्रेचर या ह्वीलचेयर से ले जाने वाले तीमारदारों के सामने वैकल्पिक रास्ते की समस्या भी खड़ी हो गई है। यदि किसी मरीज को तत्काल वार्ड, जांच केंद्र या दूसरे विभाग तक पहुंचाना हो तो ऐसी स्थिति में समय लग रहा है।
