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महाराष्ट्र के पुणे में सड़क हादसे में हवलदार जगतार सिंह की मौत हो गई। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो ग्रामीणों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।मानसा के गांव दयालपुरा के रहने वाले और सेना की दस सिख रेजिमेंट में सेवारत हवलदार जगतार सिंह की महाराष्ट्र के पुणे में सड़क हादसे में मौत हो गई। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। तिरंगे में लिपटा हवलदार जगतार सिंह का पार्थिव शरीर बठिंडा से सेना की इंजीनियर इकाई की टुकड़ी लेकर गांव पहुंचा।

इस दौरान ग्रामीणों ने ‘हवलदार जगतार सिंह अमर रहें’ के नारों के साथ अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। उनका सरकारी सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के अनुसार जगतार सिंह को बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का जुनून था। वर्ष 2005 में वह दस सिख रेजिमेंट में भर्ती हुए थे।करीब 22 साल की सेवा के दौरान उन्होंने अलग-अलग राज्यों और पदों पर रहते हुए जिम्मेदारी निभाई। मेहनत, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के कारण उन्होंने सेना में सम्मान हासिल किया।हवलदार जगतार सिंह की मौत की सूचना मिलने के बाद विधायक प्रिंसिपल बुध राम, सहायक थानेदार शैफी सिंगला और सरपंच गुरदीप सिंह ने परिवार से मुलाकात कर दुख साझा किया। सेना के अधिकारियों और जवानों के अलावा राजनीतिक व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।दस सिख रेजिमेंट के नायब हवलदार राजविंदर सिंह ने बताया कि जगतार सिंह एक सितंबर को सेना के किसी काम से स्कूटी पर निकले थे। इसी दौरान सड़क हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया।राजविंदर सिंह के अनुसार शाम करीब छह बजे नियंत्रण कक्ष से हादसे की सूचना मिली। इसके बाद वह साथी का हालचाल जानने अस्पताल पहुंचे। रात करीब आठ बजे चिकित्सकों ने जगतार सिंह को मृत घोषित कर दिया।उन्होंने बताया कि हादसे के कारणों की जांच सेना के अधिकारी कर रहे हैं। राजविंदर सिंह ने कहा कि जगतार सिंह बेहद मिलनसार और अच्छे स्वभाव के व्यक्ति थे। हादसे वाले दिन भी दोनों की मुलाकात हुई थी, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह साथी से उनकी आखिरी मुलाकात होगी।ग्रामीणों ने कहा कि जगतार सिंह के निधन से परिवार को कभी न भरने वाला नुकसान हुआ है। हालांकि, गांव को इस बात पर गर्व है कि उसका बेटा लंबे समय तक देश की सेवा के लिए समर्पित रहा।
