Wednesday, October 21, 2026
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बजट घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित—स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताएं पूरी तरह

शिमला-टीना ठाकुर

भाजपा नेता एवं विधायक डॉ. जनक राज ने विधानसभा में मांग संख्या 9 (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) पर चर्चा के दौरान प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य नीतियों और बजट घोषणाओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बजट पेश करना केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, जबकि यह संविधान के तहत सरकार का दायित्व है कि उसमें किए गए वादों को धरातल पर लागू किया जाए।
डॉ. जनक राज ने कहा कि सरकार द्वारा पिछले बजटों में की गई अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं आज भी कागजों तक सीमित हैं। उन्होंने विशेष रूप से स्क्रब टाइफस के बढ़ते मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर वर्ष 10–15 लोगों की मौत के बावजूद घोषित स्टेट लेवल रिसर्च यूनिट आज तक स्थापित नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज और कमला नेहरू अस्पताल में लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर खोलने की घोषणा भी अधूरी है, जबकि आज भी नवजात शिशुओं की माताओं को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
डॉ. जनक राज ने सरकार से सवाल किया कि प्रत्येक जिले में इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब, गेस्ट वर्कर स्क्रीनिंग प्रोजेक्ट, डायलिसिस सुविधाएं, ब्लड स्टोरेज यूनिट और न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट स्थापित करने की घोषणाओं का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी में तीन महीने में PET स्कैन सुविधा शुरू करने का वादा भी एक वर्ष बाद तक पूरा नहीं हुआ।
उन्होंने एंबुलेंस सेवाओं को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 25 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस खरीदने की घोषणा का भी कोई अता-पता नहीं है।
हिमकेयर योजना का उल्लेख करते हुए डॉ. जनक राज ने कहा कि कुछ मामलों को आधार बनाकर योजना को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि लाखों लोगों को इसका लाभ मिला है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज से कराने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में स्थापित प्रोक्योरमेंट पॉलिसी को दरकिनार कर सिविल सप्लाई के माध्यम से खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।
जनजातीय क्षेत्रों की समस्याओं को उठाते हुए उन्होंने कहा कि पांगी, भरमौर और होली जैसे क्षेत्रों में आज भी अल्ट्रासाउंड और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। महिलाओं को इलाज के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है, जो बेहद चिंता का विषय है।
डॉ. जनक राज ने कहा कि सरकार रोबोटिक सर्जरी जैसी महंगी सुविधाओं पर जोर दे रही है, जबकि प्रदेश के अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं—दवाइयां, बिस्तर, तकनीशियन और डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने इसे “प्राथमिकताओं का गंभीर असंतुलन” बताया।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी है—टेक्नीशियन, नर्स और विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। पालमपुर जैसे अस्पतालों में सर्जन होने के बावजूद एनेस्थेटिस्ट न होने से ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं।
डॉ. जनक राज ने सरकार से आग्रह किया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दिखावे के बजाय जमीनी सुधारों पर ध्यान दिया जाए और बजट में किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
अंत में उन्होंने कहा कि सरकार को अहंकार छोड़कर सभी सुझावों को गंभीरता से लेना चाहिए और प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

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