Sunday, September 6, 2026
HomeNation WiseUttar Pradeshबांके बिहारी से लेकर द्वारकाधीश तक… भारत के वो भव्य कृष्ण मंदिर,...

बांके बिहारी से लेकर द्वारकाधीश तक… भारत के वो भव्य कृष्ण मंदिर, जहां जन्माष्टमी पर उमड़ता है आस्था का सैलाब

  1. दैनिक जागो वर्ल्ड!

जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी, और इस अवसर पर भारत के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। कई मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भव्य उत्सव आयोजित होते हैं।जन्माष्टमी का त्योहार इस साल 4 सितंबर को मनाया जाएगा। भगवान कृष्ण ने इसी दिन धरती पर अवतार लिया था। भक्त इस दिन को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।गवान कृष्ण के दर्शन करने और उन्हें भोग लगाने के लिए इस दिन मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। आइए जानें भारत के कुछ मशहूर कृष्ण मंदिरों के बारे में, जहां जन्माष्टमी के मौके पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। बांके बिहारी मंदिर, उत्तर प्रदेशभगवान कृष्ण के मंदिरों में सबसे पहला नाम बांके बिहारी मंदिर का आता है। भगवान कृष्ण की लीलाभूमि वृंदावन में स्थित ये मंदिर दुनियाभर में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। आम दिनों पर भी इस मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन जन्माष्टमी के मौके पर यहां की रौनक देखने लायक होती है। यहां भगवान कृष्ण की मूर्ति है, जिसके आगे लगा पर्दा पुजारी बार-बार बंद करते रहते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान कृष्ण की इस मूर्ति की आंखों में ज्यादा देर देखने से भक्त अपनी सुद खो बैठते हैं।  जन्माष्टमी के मौके पर यहां खास उत्सव मनाया जाता है। 

गुजरात के द्वारका में स्थित यह मंदिर चार धामों में से एक है। इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। माना जाता है कि ये वहीं जगह है, जहां भगवान कृष्ण ने अपनी द्वारका नगरी बसाई थी और राजा के रूप में शासन किया था। इसलिए इस मंदिर का नाम द्वारकाधीश पड़ा। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां भगवान द्वारकाधीश का खास शृंगार किया जाता है और आधी रात को पूरा मंदिर दय कन्हैया लाल के जयकारों से गूंज उठता है।पुरी का जगन्नाथ मंदिर भी चार धामों में शामिल है। यहां भगवान कृष्ण अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। इस मंदिर में भगवान की मूर्ती लकड़ी से बनी है और हर साल भव्य रथ यात्रा निकलती है, जो पूरी दुनिया में मशहूर है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां भगवान कृष्ण को 56 भोग लगाए जाते हैं और काफी उल्लास के साथ जन्माष्टमी मनाई जाती है।वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में राधा रमन मंदिर भी शामिल है। राधा रमन का मतलब होता है, राधा को आनंद देने वाले, जो भगवान कृष्ण हैं। इस मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर महाभिषेक होता है, जिसमें शामिल होने दूर-दूर से भक्त आते हैं। 

RELATED ARTICLES

Most Popular