दैनिक जागो वर्ल्ड!बिहार

बिहार ‘ड्राई स्टेट’ है, लेकिन जमीनी हकीकत का हर पन्ना एक नया अफसाना बयां करता है। कानूनन तो यहां शराब बेचना; खरीदना और पीना अपराध है, लेकिन बीते रोज पटना में जहरीली शराब पीने से हुई 4 लोगों की मौत ने इसकी पोल खोल दी है।इतना ही नहीं अगस्त महीने की शुरुआत में ही भोजपुर जिले के आरा में तस्करी कर लाई जा रही शराब की 1 करोड़ रुपये की खेप पकड़ी गई थी। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि हकीकत में न तो जाम छलकने बंद हुए और न ही इसकी तस्करी।

चेकपोस्ट से लेकर गलियों तक फैले नेटवर्क, होम डिलीवरी के नए-नए तरीकों और रोजाना होती गिरफ्तारियों के बीच आज बिहार की शराबबंदी एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहां नुकसान राजस्व का भी है और कानून-व्यवस्था का भी। इस पर सियासी घमासान भी कम नहीं है।बिहार के अलावा मिजोरम और नागालैंड जैसे राज्यों में भी शराब पर प्रतिबंध लागू हैं। हाल ही में मणिपुर और गुजरात में प्रतिबंध हटाए गए हैं। बहरहाल, बात करें अपने बिहार की तो यहां शराबबंदी लागू हुए करीब 10 साल बीत चुके हैं।ऐसे में आइए जानते हैं कि इसका प्रदेश पर क्या कुछ असर पड़ा। सबसे पहले समझते हैं इसे लागू करने के प्रमुख कारण क्या रहे?स्वास्थ्य से जुड़े फायदे: बिहार में शराब पर रोक को लेकर लोग तर्क देते हैं कि इससे शराब से जुड़ी बीमारियों, दुर्घटनाओं और मौतों में कमी लाकर लोगों की सेहत में सुधार हो सकता है। जहरीली शराब पीने से मौत जैसी घटनाओं में कमी आ सकती है।
सामाजिक कल्याण: लोगों का मानना है कि शराब पर रोक लगाने से शराब के गलत इस्तेमाल से जुड़ी सामाजिक समस्याओं, जैसे घरेलू हिंसा, अपराध दर और परिवार के टूटने जैसी दिक्कतों को कम किया जा सकता है।
सांस्कृतिक और धार्मिक पहलू: भारत जैसे विविध सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं वाले देश में, कुछ समूह सांस्कृतिक या धार्मिक सिद्धांतों के आधार पर शराब पर रोक की वकालत करते हैं।
