दैनिक जागो वर्ल्ड!मेरठ

बच्चा पार्क चौराहे पर होने वाले जलभराव से हर साल न केवल कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है बल्कि आसपास बसे मुहल्लों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या का लोग स्थायी समाधान चाहते हैं। लगातार इसकी मांग कर रहे हैं।जलभराव का स्थायी समाधान चाहते हैं। इसके लिए कार्य योजना बने और धरातल पर काम हो। इसे लेकर दैनिक जागरण ने मुहिम शुरू की है। इसी कड़ी में शुक्रवार को नगर निगम के मुख्य अभियंता ने बच्चा पार्क नाले का स्थलीय निरीक्षण किया निरीक्षण करने के बाद मुख्य अभियंता प्रमोद कुमार सिंह ने भी माना कि बच्चा पार्क चौराहे पर जलभराव से निजात तभी मिल सकती है, जब अंग्रेजों के जमाने के भूमिगत नाले को तोड़कर सभी अवरोध दूर करके नए सिरे से नया नाला बनाना पड़ेगा। तीन स्थानों पर जल प्रवाह को रोक रही गंगाजल आपूर्ति की पाइप लाइन को नाले से ऊपर उठाना पड़ेगा।मुख्य अभियंता ने यह भी माना कि बच्चा पार्क चौराहे पर अनियोजित और अनियंत्रित जलनिकासी की व्यवस्था है। गंगाजल की पाइप लाइन जिस वक्त डाली गई तब इसे ऊंचाई से डाला गया होता तो जल प्रवाह बाधित न होता। यह काम उस वक्त सुनियोजित तरीके से न करके काम चलाऊ कर दिया गया। जिसके चलते जल प्रवाह में अवरोध पैदा हो गया।चौराहे पर 50 मीटर भूमिगत नाला डाट तकनीक से बना हुआ है, यह तकनीक आज से 40 साल पहले की है। भूमिगत नाले के अंदर न तो मशीन जा सकती है और न ही कर्मचारी। इसकी सफाई नहीं हो रही है। इसके अंदर कचरा और गाद जमा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए भूमिगत नाले को तोड़ना पड़ेगा।नगर निगम ने प्राथमिक सर्वे पूरा कर लिया है। यह पाया गया है कि तीन स्थानों थापर नगर पुलिस चौकी के पास, एनएएस कालेज के पास और बच्चा पार्क चौराहे पर नाले के अंदर से जो गंगाजल की पाइप लाइनें गुजर रहीं हैं, उनको पांच फीट कम से कम ऊपर उठाना पड़ेगा।इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। दूसरा काम बच्चा पार्क चौराहे पर भूमिगत नाले को तोड़कर नए सिरे से जलभराव के पीक लोड के अनुसार डिजाइन बनाकर नये नाले का निर्माण करना होगा। क्योंकि भूमिगत नाला 2.5 मीटर चौड़ा है, जबकि इससे पहले 4.50 मीटर चौड़ा खुला नाला है। बेहतर जलनिकासी के लिए एक समान लेवल का नाला बनाने के लिए डिजाइन तैयार करना होगा। मुख्य अभियंता ने कहा कि प्रस्ताव जल्द तैयार कर नगर आयुक्त और महापौर के सामने रखेंगे।बच्चा पार्क चौराहे पर भूमिगत नाले में कचरा जाने से रोकने के लिए जलीकोठी की ओर से आ रहे नाले के अंदर एक स्थान पर लोहे का जाल लगाया गया है।खैरनगर चौराहे से आ रहे नाले की जलनिकासी के लिए लेडीज पार्क बिजली उपकेंद्र के पास ह्यूम पाइप डाले गए हैं। इससे जलनिकासी मेें थोड़ी तेजी आई है।टेंडर करने के बाद मेडा ने खड़े कर लिए थे हाथबिना ड्रेेनेज मास्टर प्लान के शहर को बसाने वाले मेरठ विकास प्राधिकरण की कथनी-करनी में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। जलभराव की समस्या से घिरे बच्चा पार्क चौराहे का सुंदरीकरण व विस्तारीकरण योजना के तहत मेरठ विकास प्राधिकरण ने बच्चा पार्क चौराहे की भूमिगत जलनिकासी की समस्या को दूर करने के लिए टेंडर कर दिया था। यह बात दिसंबर 2025 की है। लेकिन बाद में मेरठ विकास प्राधिकरण ने यह काम कराने से हाथ खड़े कर लिए।जिसके चलते जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हो सका। इस बार पहली मानसून के साथ जब जलभराव की समस्या ने विकराल रूप लिया तो नगर निगम अधिकारियों ने कमिश्नर से बात की और इस काम को अपने जिम्मे ले लिया है।ढाई लाख आबादी की जलनिकासी का है ये नालाबच्चा पार्क चौराहा नालों का जंक्शन है। मिशन कंपाउंड, खैरनगर दवा बाजार, छतरी पीर, जलीकोठी, कैंट क्षेत्र के भैंसाली मैदान तक का और थापरनगर, भैंसाली बस अड्डे के पीछे तक का पानी इसी नाले में आता है। चौराहे पर तीन नाले एक हो जाते हैं और भूमिगत नाले से सारा पानी आगे जाता है।भूमिगत नाला चोक होने से ओवर फ्लो होकर भीषण जलभराव होता है। जलभराव होने पर चौराहे के पास स्थिति ऐसी बन जाती है कि न सड़क दिखती है, न नाला। दुकानों-घरों में पानी भर जाता है। करीब 60 हजार आबादी की जलनिकासी वाले नाले में ढाई लाख आबादी की जलनिकासी का भार डाल दिया गया है।
