Wednesday, October 21, 2026
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बिहार और झारखंड दोनों जगह से लिया PM आवास, 6 परिवारों के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश; अब होगी वसूली

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चकाई (जमुई) के छह परिवारों ने बिहार और झारखंड दोनों राज्यों में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ फर्जी तरीके से लिया। प्रशासन अब इन सभी परिवारों से योजना की पूरी राशि वसूलने की तैयारी में है, जिसमें अब तक केवल एक से वसूली हुई है।प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ बिहार और झारखंड में फर्जीवाड़ा कर चकाई के आधा दर्जन परिवारों ने लाभ ले लिया। चकाई और देवघर में दो जगह लेने वाले सभी छह परिवारों पर अब प्रशासन का शिकंजा कस गया है।प्रधानमंत्री आवास योजना की नेशनल मॉनिटरिंग टीम द्वारा देश भर में किए गए जांच के दौरान चकाई प्रखंड में यह मामला सामने आया है। इन मामलों में संबंधित लाभुकों से योजना की पूरी राशि वसूल करने का निर्देश दिया गया है।

चकाई बीडीओ मनीष आनंद ने 18 सितंबर को पत्र के माध्यम से छह पंचायतों के आवास सहायकों को कार्रवाई तेज करने और वसूल की गई राशि राज्य खाते में जमा कराने का निर्देश दिया है।जांच में चंद्रमंडीह पंचायत के विनोद राय, माधोपुर की सुगिया देवी, डढ़वा की सांझा देवी, कल्याणपुर की राधा देवी, रामसिंहडीह की प्रभा देवी और कियाजोरी पंचायत के राजेंद्र राम के मामले सामने आए हैं।आरोप है कि इन परिवारों ने बिहार के साथ झारखंड देवघर में भी पीएम आवास योजना का लाभ लिया। चकाई में प्रधानमंत्री ग्रामीण तो देवघर में प्रधानमंत्री शहरी योजना का लाभ लिया गया है। प्रशासन ने अब दोनों जगह से मिले लाभ को आधार बनाकर पूरी राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की है।प्रशासनिक आदेश के बाद भी कार्रवाई की रफ्तार सुस्त है। अब तक छह मामलों में सिर्फ रामसिंहडीह पंचायत से 45 हजार रुपये की वसूली हो सकी है। शेष पांच लाभुकों से राशि की वसूली अभी बाकी है।बीडीओ ने संबंधित आवास सहायकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि लाभुकों को नोटिस देकर राशि जमा कराई जाए। तीन नोटिस के बाद भी राशि जमा नहीं करने पर सर्टिफिकेट केस की कार्रवाई की जाएगी।आधार और डिजिटल डेटा के बावजूद कैसे मिला दो जगह लाभ?इस पूरे मामले ने आवास योजना की सत्यापन व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पीएम आवास योजना में लाभुकों का आधार, बैंक खाता और योजना से संबंधित डेटा डिजिटल रूप से दर्ज होता है, इसके बावजूद यदि एक ही परिवार बिहार और झारखंड में योजना का लाभ लेने में सफल रहा तो दोनों राज्यों के डेटा के बीच सत्यापन में चूक कहां हुई?स्थानीय स्तर पर लाभुकों के सत्यापन के दौरान भी यह मामला क्यों नहीं पकड़ा गया? प्रशासन अब इन सवालों के जवाब तलाशने के साथ राशि की वसूली पर जोर दे रहा है।

अब कार्रवाई सिर्फ कागज पर, या होगी पूरी वसूली?छह परिवारों के मामले सामने आने के बाद प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सरकारी राशि की शत-प्रतिशत वसूली की है। एक मामले में 45 हजार रुपये की वसूली हुई है, जबकि पांच मामलों में कार्रवाई बाकी है।तीन नोटिस के बाद सर्टिफिकेट केस की चेतावनी से साफ है कि प्रशासन अब वसूली को लेकर सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है।

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