Sunday, September 6, 2026
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यूपी कैडर की IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा: लंदन की नौकरी छोड़ी, डीएम मिर्जापुर बनीं, अब शिक्षा-लेखन होगा नया सफर!

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आईएएस दिव्या मित्तल ने 13 साल की सेवा के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई कर लंदन में नौकरी छोड़ने वाली दिव्या अब शिक्षा और लेखन के क्षेत्र में नई पारी शुरू करेंगी।ऊंची तनख्वाह वाली नौकरी से शुरू हुआ सफर प्रशासन की सबसे प्रतिष्ठित कुर्सी तक पहुंचा और फिर उसी कुर्सी को छोड़कर अब एक नई राह पर निकल पड़ा है। यह कहानी है दिव्या मित्तल की आइआइटी दिल्ली की छात्रा, आईआईएम बेंगलुरु की प्रबंधन विशेषज्ञ, लंदन में मैनेजमेंट कंसल्टेंट और 2013 बैच की आईएएस अधिकारीमीरजापुर की जिलाधिकारी रहते हुए आम लोगों से सीधे संवाद और अपने काम करने के अलग अंदाज से पहचान बनाने वाली दिव्या मित्तल ने अब भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है। सरकारी सेवा के बाद उनकी अगली पारी शिक्षा और लेखन से जुड़ी होगी।

दिव्या मित्तल की कहानी किसी सामान्य सरकारी नौकरी की तैयारी से शुरू नहीं होती। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बीटेक किया और इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए। देश के दो प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लंदन का रुख किया और वहां मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में काम किया।करियर चमकदार था, लेकिन मंजिल कुछ और थी। कॉरपोरेट की नौकरी छोड़कर उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। मेहनत रंग लाई और 2013 में उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा में हुआ। यहीं से उनके जीवन ने दूसरा बड़ा मोड़ लिया।कॉरपोरेट की दुनिया से सरकारी व्यवस्था तकआईएएस बनने के बाद उत्तर प्रदेश कैडर में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालते हुए दिव्या मित्तल ने फील्ड प्रशासन का अनुभव हासिल किया। अलग-अलग जिम्मेदारियों के दौरान उनका जोर योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने और जनता से सीधा संवाद रखने पर रहा। तकनीक और सोशल मीडिया का इस्तेमाल उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा बना। सरकारी तंत्र की भाषा को आम आदमी तक सहज तरीके से पहुंचाने और लोगों की शिकायतों पर सीधे प्रतिक्रिया देने के कारण वह प्रशासनिक अधिकारियों की भीड़ में अलग नजर आईं।मीरजापुर में डीएम बनीं तो जनता से बढ़ी नजदीकीमीरजापुर की जिलाधिकारी के रूप में दिव्या मित्तल का कार्यकाल उनकी पहचान का सबसे चर्चित अध्याय बना। पहाड़ी और ग्रामीण भूगोल वाले जिले में विकास की चुनौतियों के बीच उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण विकास और पर्यटन से जुड़े मुद्दों पर काम किया। लेकिन उनकी सबसे अलग पहचान बनी लोगों से सीधे संवाद की।मीरजापुर में कार्यकाल चर्चा में रहासोशल मीडिया पर सक्रियता के जरिये उन्होंने सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों को आम लोगों तक पहुंचाया। समस्या बताने वाले लोगों को जवाब देना और प्रशासन को जनता के करीब लाने की कोशिश उनकी शैली का हिस्सा रही। इसी वजह से मीरजापुर में उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उनकी चर्चा बनी रही। एक जिलाधिकारी के रूप में उन्होंने सिर्फ सरकारी पद नहीं संभाला, बल्कि लोगों के बीच अपनी एक अलग छवि बनाई।अब सरकारी फाइलों से बाहर नई शुरुआतकई वर्षों की प्रशासनिक सेवा के बाद दिव्या मित्तल ने अब आईएएस से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला उनके करियर का तीसरा बड़ा मोड़ कहा जा सकता है। पहला मोड़ था, कॉरपोरेट की सुरक्षित नौकरी छोड़कर सिविल सेवा में आना। दूसरा आईएएस अधिकारी के रूप में फील्ड प्रशासन में अपनी अलग पहचान बनाना। और तीसरा, प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा को छोड़कर अब अपनी पसंद के क्षेत्र में नई पारी शुरू करना।शिक्षा और लेखन बनेगा अगला पड़ावसरकारी सेवा से अलग होने के बाद दिव्या मित्तल का फोकस शिक्षा, युवाओं को प्रेरित करने और लेखन पर रहेगा। प्रशासनिक सेवा में मिले अनुभवों को वह अब व्यापक समाज और खासकर नई पीढ़ी के साथ साझा करना चाहती हैं। आईएएस के रूप में उन्होंने जिन समस्याओं को करीब से देखा, लोगों की जिन परेशानियों को समझा और प्रशासन चलाने के जो अनुभव हासिल किए, वही अब उनकी नई पारी की पूंजी होंगे।एक सफर, कई मुकामदिव्या मित्तल का सफर इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने जिंदगी में एक नहीं, कई बार सुरक्षित रास्ते को छोड़कर नया रास्ता चुना। आईआईटी और आईआईएम के बाद लंदन की नौकरी छोड़ी और आईएएस बनीं। इसके के बाद जिलों में काम किया और मिर्जापुर में जनता के बीच अलग पहचान बनाई। अब आईएएस की नौकरी भी छोड़ दी। सरकारी सेवा का अध्याय खत्म हुआ है, लेकिन लोगों से जुड़ने का सिलसिला नहीं। अंतर बस इतना है कि अब वह किसी जिले की जिलाधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि अपने अनुभव, शिक्षा और लेखन के जरिये लोगों के बीच होंगी।लंदन से लखनऊ और लखनऊ से मीरजापुर तक का सफर तय करने वाली दिव्या मित्तल अब एक बार फिर रास्ता बदल रही हैं,इस बार मंजिल प्रशासनिक कुर्सी नहीं, बल्कि शिक्षा और लेखन के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचना है।

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