Sunday, September 6, 2026
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बिहार के 19 जिलों में 1 सितंबर से घर बैठे बुक होगी खाद, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और पटना भी शामिल

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बिहार के 19 जिलों में 1 सितंबर से फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन सिस्टम (FSAS) लागू होगा, जिससे किसानों को घर बैठे खाद बुक करने की सुविधा मिलेगी। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म खाद वितरण में पारदर्शिता लाएगा। किसानों को रियायती दर पर सुगमता से खाद उपलब्ध कराने के लिए सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और पटना समेत बिहार के 19 जिलों में पहली सितंबर से फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन सिस्टम (FSAS) लागू किया जा रहा है।भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और किसानों को लंबी कतारों से मुक्ति दिलाना है।वैशाली और शेखपुरा में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब दूसरे चरण में उत्तर और दक्षिण बिहार के प्रमुख कृषि प्रधान जिलों को इससे जोड़ा गया है।19 जिलों का चयनद्वतीय चरण में सीतामढ़ी, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, मधुबनी, सारण, सीवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और भागलपुर को शामिल किया गया है।इस व्यवस्था को धरातल पर सुचारू रूप से लागू करने के लिए कृषि विभाग मास्टर ट्रेनर के माध्यम से सभी खुदरा उर्वरक विक्रेताओं को विशेष प्रशिक्षण दे रहा है। नये सिस्टम के प्रभावी होने के बाद अन्नदाताओं को खाद के लिए दुकानों के चक्कर लगाने या घंटों लाइन में खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इस व्यवस्था के तहत किसान मोबाइल ऐप डाउनलोड कर राज्य का चयन करने के बाद अपनी किसान आईडी अथवा आधार नंबर दर्ज करके ओटीपी से लॉगिन करेंगे।इसके बाद किसान अपनी पसंद की नजदीकी दुकान और यूरिया अथवा डीएपी जैसी जरूरी खाद की मात्रा चुनकर ऑनलाइन बुकिंग पूरी कर सकेंगे। बुकिंग कन्फर्म होते ही मोबाइल पर एक क्यूआर कोड आधारित ई-टोकन जनरेट होगा, जिसके माध्यम से किसान 48 घंटे के भीतर खाद प्राप्त कर सकते हैं।र्वरक बुकिंग अथवा वितरण में आने वाली किसी भी तकनीकी व व्यावहारिक समस्या के समाधान के लिए पंचायत से लेकर जिला स्तर तक विशेष निगरानी समितियों का गठन किया गया है।पचायत स्तर पर गठित समिति में कृषि समन्वयक और किसान सलाहकार दो कार्य दिवसों के भीतर किसानों की शिकायतों का निपटारा सुनिश्चित करेंगे। प्रखंड स्तर पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी तीन दिन, अनुमंडल स्तर पर पांच दिन तथा जिला स्तर पर जिला कृषि पदाधिकारी की समिति अधिकतम सात कार्य दिवसों में समस्या का समाधान करेगी।

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