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बिहार में मैट्रिक के नतीजे एक सप्ताह में जारी होंगे और शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए एक विशेष विश्वविद्यालय बनेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, शिक्षकों के स्थानांतरण नीति को आसान बनाने और निजी विश्वविद्यालयों को बढ़ावा देने की घोषणा की।बिहार में मैट्रिक की परीक्षा का परिणाम एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर जारी करने का लक्ष्य तय किया गया है।राज्य के करीब सात लाख से अधिक शिक्षकों के प्रशिक्षण और गुणवत्ता में सुधार के लिए एक अलग से विशेष विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।ये घोषणा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में की। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, मंत्री शीला कुमारी मौजूद रहीं।

मुख्यमंत्री ने परीक्षा प्रणाली में लेटलतीफी पर चिंता जताते हुए कहा कि इंजीनियरिंग व पाॅलिटेक्निक का परिणाम 24 घंटे में जारी करने की व्यवस्था खड़ी की जाएगी।यदि किसी छात्र के अंक कम आते हैं, तो उसके लिए 15 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा देकर तुरंत परिणाम पाने का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। परीक्षा सुधार को लेकर पटना उच्च न्यायालय के एक ‘सिटिंग जज’ की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया हैमुख्यमंत्री ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से आग्रह किया कि कॉपियों के मूल्यांकन को पूरी तरह से विकेंद्रीकृत कर सेंटर वाइज रिजल्ट जारी करने की दिशा में काम किया जाए।नए विश्वविद्यालय में शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षणमुख्यमंत्री ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर उच्च शिक्षा तक राज्य में लगभग सात लाख से अधिक शिक्षक हैं। इनकी गुणवत्ता और सहूलियत के लिए सरकार एक नया विश्वविद्यालय बनाएगी, जो विशेष रूप से शिक्षकों के प्रशिक्षण का काम करेगा।
