दैनिक जागो वर्ल्ड!मेरठ

मेरठ विकास प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भवनों का सर्वे शुरू किया है। अब तक 10 हजार भवनों का सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि प्राधिकरण क्षेत्र में भवनों की अनुमानित संख्या आठ लाख से अधिक बताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने अपने पूरे क्षेत्राधिकार में भवनों का सर्वे शुरू कर दिया है।स सर्वे के तहत भवनों के मानचित्र (नक्शे) और उनके वास्तविक उपयोग की जानकारी एकत्र की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप है या नहीं। या फिर वास्तविक भूउपयोग का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है।गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास विकास परिषद की कालोनी शास्त्रीनगर में अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया था, जिसका प्रकरण काफी चर्चा में रहा था। शास्त्रीनगर में यह कार्रवाई अभी भी जारी है। इसी आदेश के क्रम में अब मेरठ विकास प्राधिकरण ने भी अपने पूरे क्षेत्र में भवनों की जांच का अभियान छेड़ा है।

प्राधिकरण के अनुसार करीब 10 हजार भवनों का सर्वे पूरा किया जा चुका है। प्राधिकरण क्षेत्र में कुल भवनों की अनुमानित संख्या आठ लाख से अधिक बताई जा रही है, जिन सभी का सर्वे किया जाना है।धिकारियों के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में करीब तीन से चार महीने का समय लग सकता है। सर्वे के दौरान भवनों के नक्शे की स्वीकृति, निर्माण की वास्तविक स्थिति और भू-उपयोग जैसे बिंदुओं की जांच की जा रही है। इससे यह स्पष्ट होगा कि किन भवनों में स्वीकृत नक्शे से हटकर अतिरिक्त या अवैध निर्माण किया गया है।सर्वे पूरा होने के बाद ऐसे भवनों को चिह्नित कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई किए जाने की संभावना है। इसके अंतर्गत अलग-अलग जोन में कर्मचारी अपने अनुसार सर्वे कर रहे हैं। अभी तक दिल्ली रोड, बागपत रोड, गंगानगर, मोदीपुरम क्षेत्र, सिविल लाइंस में सर्वे किया जा चुका है। मेडा के सचिव अर्पित गुप्ता ने बताया कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के साथ ही सर्वे भी जारी है।
