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उपमंडल बंगाणा की ग्राम पंचायत मलांगड़ के अमरेहड़ा में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की महिमा के साथ-साथ नारद ऋषि से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों का श्रवण किया। कथा व्यास आचार्य श्री श्री गोपाल स्वरूप शर्मा जी महाराज ने श्रद्धालुओं को नारद ऋषि की तपस्या, कामदेव पर विजय तथा इसके बाद उत्पन्न हुए अहंकार से जुड़े प्रसंग का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। कथा के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। कथा व्यास आचार्य श्री श्री गोपाल स्वरूप शर्मा जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म के धार्मिक ग्रंथों में वर्णित प्रसंग केवल कथा नहीं हैं, बल्कि मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा भी प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि नारद ऋषि ने कठोर तपस्या की और अपनी साधना के बल पर कामदेव पर विजय प्राप्त की। कामदेव द्वारा नारद ऋषि की तपस्या भंग करने के प्रयास के बावजूद नारद ऋषि अपने तप से विचलित नहीं हुए। इसके बाद उनके मन में यह भाव उत्पन्न हुआ कि उन्होंने कामदेव को जीत लिया है।आचार्य जी ने श्रद्धालुओं को बताया कि नारद ऋषि भगवान शिव और ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और अपने तप तथा कामदेव पर विजय का प्रसंग सुनाया। इसके पश्चात वे भगवान विष्णु के पास भी पहुंचे और उन्हें भी अपने द्वारा कामदेव पर विजय प्राप्त करने की बात बताई। कथा व्यास ने कहा कि भगवान विष्णु ने नारद ऋषि के भीतर उत्पन्न हुए अहंकार को समाप्त करने के लिए उनकी परीक्षा लेने का निर्णय लिया।
उन्होंने कथा में आगे बताया कि भगवान विष्णु ने नारद ऋषि के अहंकार को दूर करने के उद्देश्य से शीलनिधि के दरबार का प्रसंग रचा। इस प्रसंग में नारद ऋषि मोह और अहंकार के प्रभाव में आ गए। कथा के माध्यम से आचार्य श्री ने समझाया कि मनुष्य चाहे कितना भी बड़ा तपस्वी, विद्वान अथवा साधक क्यों न हो, उसे अहंकार से हमेशा बचना चाहिए। अहंकार व्यक्ति की बुद्धि और विवेक को प्रभावित कर सकता है।
कथा के दौरान नारद ऋषि और भगवान विष्णु से जुड़े प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया गया। आचार्य श्री गोपाल स्वरूप शर्मा जी महाराज ने बताया कि नारद ऋषि द्वारा भगवान विष्णु को श्राप देने का प्रसंग भी इसी कथा क्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि भगवान की लीला को सामान्य दृष्टि से नहीं समझा जा सकता। प्रत्येक प्रसंग के पीछे कोई न कोई गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा होता है।
आचार्य श्री ने कहा कि शिव महापुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाएं मनुष्य को अहंकार, मोह और क्रोध से दूर रहने तथा सत्य, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि धार्मिक कथा का श्रवण करने के साथ-साथ उसमें दिए गए संदेश को अपने जीवन में भी उतारना चाहिए।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव, भगवान विष्णु और नारद ऋषि के जयकारे लगाए। अमरेहड़ा में आयोजित इस धार्मिक आयोजन को लेकर ग्रामीणों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और सभी परिवारों के कल्याण की प्रार्थना की।
